स्वच्छ भारत दिवस मनाए जाने संबंधित
स्वच्छता ही सेवा अभियान 2025: स्कूलों के लिए लोक शिक्षण संचालनालय का नया आदेश, जानें हर दिन की गतिविधियों की पूरी रूपरेखा
अभियान की पृष्ठभूमि और सरकारी दिशा-निर्देश
मध्यप्रदेश के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में एक बार फिर स्वच्छता को लेकर एक बड़े जन-आंदोलन की शुरुआत होने जा रही है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले 'स्वच्छ भारत दिवस' के पूर्व देशव्यापी और राज्यव्यापी "स्वच्छता ही सेवा अभियान 2025" को लेकर कड़े और विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। यह अभियान 17 सितम्बर से शुरू होकर 02 अक्टूबर 2025 तक लगातार 15 दिनों तक प्रदेश के हर कोने में स्थित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में पूरी गंभीरता के साथ चलाया जाएगा।
इस बार के आदेश में केवल औपचारिकता निभाने पर रोक लगाई गई है। विभाग ने साफ किया है कि इस अभियान का वास्तविक उद्देश्य बच्चों के व्यवहार में बदलाव लाना है ताकि वे स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बना सकें। इसके साथ ही, इस पूरी कवायद में स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और अभिभावकों को भी सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है ताकि स्कूलों से निकलने वाली स्वच्छता की गूंज पूरे गांव और शहर में सुनाई दे।
स्कूलों में आयोजित होने वाली मुख्य गतिविधियाँ
15 दिनों के इस लंबे समय में स्कूलों के भीतर और बाहर कई तरह के रचनात्मक, जागरूकता और व्यावहारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार गतिविधियों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है:
1. बौद्धिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं
बच्चों में वैचारिक स्तर पर स्वच्छता के महत्व को स्थापित करने के लिए स्कूल स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें निबंध लेखन, तात्कालिक भाषण (वाद-विवाद), चित्रकला, पोस्टर मेकिंग और देशभक्ति/स्वच्छता पर आधारित कविता पाठ शामिल हैं। इन प्रतियोगिताओं के विषय 'मेरा स्वच्छ विद्यालय', 'कचरा मुक्त भारत' और 'प्लास्टिक के नुकसान' जैसे प्रासंगिक मुद्दों पर आधारित होंगे। स्कूल स्तर पर विजेताओं को 2 अक्टूबर को सम्मानित भी किया जाएगा।
2. व्यावहारिक श्रमदान और सफाई अभियान
केवल बातें करने से सफाई नहीं होती, इसी सोच के साथ इस बार व्यावहारिक गतिविधियों पर ज्यादा जोर है। विद्यालय के सभी छात्र (उम्र और क्षमता के अनुसार) और शिक्षक मिलकर क्लासरूम, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल के मैदान और स्कूल के पीछे पड़े बेकार कबाड़ की सफाई करेंगे। इसके साथ ही पानी की टंकियों, हाथ धोने के स्टेशनों और शौचालयों की विशेष सफाई व मरम्मत के लिए स्थानीय प्रशासन की मदद ली जाएगी।
3. सामुदायिक रैलियां और जन-जागरूकता
स्कूलों से प्रभात फेरी और रैलियां निकाली जाएंगी जिसमें बच्चे तख्तियों और नारों के माध्यम से गांव या मोहल्ले के लोगों को खुले में कचरा न फेंकने तथा सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित करेंगे। कई जगहों पर बच्चों के द्वारा बाजारों और चौराहों पर नुक्कड़ नाटकों का मंचन भी किया जाएगा, जो लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
25 सितम्बर 2025: "एक दिन, एक घंटा, एक साथ" — मेगा श्रमदान दिवस
इस पूरे 15 दिवसीय अभियान का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पड़ाव 25 सितम्बर 2025 को आने वाला है। इस दिन पूरे देश के साथ-साथ मध्यप्रदेश के सभी स्कूलों में एक व्यापक श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका नारा दिया गया है—"एक दिन, एक घंटा, एक साथ"।
इस विशेष दिन पर सुबह ठीक 10 बजे से 11 बजे तक (या विद्यालय के समय अनुसार तय एक घंटे में) संस्था के सभी लोग—चाहे वे प्राचार्य हों, शिक्षक हों, भृत्य हों या छात्र हों—एक साथ मिलकर सफाई का काम शुरू करेंगे। इस दिन स्कूल परिसर से बाहर निकलकर पास के किसी सार्वजनिक स्थान, जैसे सार्वजनिक कुआं, पंचायत भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या बस स्टैंड की सफाई का जिम्मा भी स्कूल गोद ले सकते हैं। इस कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रनिधियों (विधायक, सरपंच, पार्षद) को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के विशेष निर्देश दिए गए हैं ताकि जनभागीदारी को और बल मिल सके।
गतिविधियों का प्रस्तावित दैनिक कैलेंडर (15 दिवसीय रूपरेखा)
शिक्षकों और नोडल अधिकारियों की सुविधा के लिए विभाग ने एक अनौपचारिक लेकिन प्रभावी समयसारिणी का सुझाव दिया है, जिसके आधार पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकता है:
| दिनांक | प्रस्तावित कार्यक्रम / गतिविधि | मुख्य फोकस क्षेत्र |
|---|---|---|
| 17 सितम्बर | अभियान का शुभारंभ एवं स्वच्छता शपथ | सभी छात्रों और स्टाफ द्वारा सामूहिक प्रतिज्ञा |
| 18-20 सितम्बर | विद्यालय परिसर की सघन आंतरिक सफाई | कक्षाएं, डेस्क, ब्लैकबोर्ड और कोनों की सफाई |
| 21-22 सितम्बर | रचनात्मक प्रतियोगिताएं (चित्रकला/निबंध) | छात्रों के विचारों को कागज़ पर उभारना |
| 23-24 सितम्बर | जल स्रोतों एवं शौचालयों का कायाकल्प | शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करना और सैनिटाइजेशन |
| 25 सितम्बर | राष्ट्रव्यापी मेगा श्रमदान दिवस (1 घंटा) | जनप्रतिनिधियों और समुदाय के साथ सामूहिक सफाई |
| 26-28 सितम्बर | गांव/मोहल्ले में जागरूकता रैली व नुक्कड़ नाटक | स्कूल की बाउंड्री से बाहर समाज तक संदेश पहुंचाना |
| 29-30 सितम्बर | 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से कंचन) प्रदर्शनी | प्लास्टिक बोतलों और रद्दी से उपयोगी वस्तुएं बनाना |
| 01 अक्टूबर | भावी कार्ययोजना और समीक्षा बैठक | बनाई गई व्यवस्था को सालभर कायम रखने पर चर्चा |
| 02 अक्टूबर | महात्मा गांधी जयंती एवं पुरस्कार वितरण | उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों व स्टाफ का सम्मान |
मीडिया कवरेज, सोशल मीडिया और दैनिक रिपोर्टिंग
वर्तमान दौर में किसी भी अभियान की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसका संदेश समाज में कितनी दूर तक जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश में स्पष्ट किया है कि हर स्कूल को अपने स्तर पर किए जा रहे अच्छे कार्यों को स्थानीय समाचार पत्रों और मीडिया चैनलों में प्रकाशित करवाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (जैसे X/ट्विटर, फेसबुक) पर #SwachhataHiSeva और #SHS2025 हैशटैग का उपयोग करते हुए तस्वीरों को पोस्ट किया जाए।
ब्लॉक और जिला स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारी प्रतिदिन अपने अधिकार क्षेत्र के स्कूलों से रिपोर्ट कलेक्ट करेंगे। जो स्कूल रिपोर्टिंग में लापरवाही बरतेंगे या बिना किसी ठोस कारण के गतिविधियों का आयोजन नहीं करेंगे, उनके संस्था प्रमुखों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) — जो शिक्षक और नोडल अधिकारी पूछ रहे हैं
Q1. क्या यह अभियान निजी (Private) स्कूलों के लिए भी अनिवार्य है?
उत्तर: जी हाँ, लोक शिक्षण संचालनालय का यह आदेश राज्य के सभी बोर्ड (MP Board, CBSE, ICSE) से संबद्ध शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों पर समान रूप से लागू होता है। स्वच्छता का संस्कार हर बच्चे के लिए जरूरी है।
Q2. 25 सितम्बर के मेगा श्रमदान में क्या बाहरी लोगों को शामिल करना जरूरी है?
उत्तर: अनिवार्य तो नहीं है, लेकिन अत्यधिक अनुशंसित (Recommended) है। शाला प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों, माता-पिता और स्थानीय वार्ड मेंबर या सरपंच को जोड़ने से कार्यक्रम का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
Q3. प्रतियोगिताओं के विजेताओं को दिए जाने वाले पुरस्कारों का खर्च कहाँ से आएगा?
उत्तर: स्कूल इसके लिए अपने संकुल या स्कूल फंड में उपलब्ध 'आकस्मिक निधि' (Contingency Fund) या कंपोजिट स्कूल ग्रांट का नियमानुसार उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय समाजसेवियों से कॉपियां या मेडल स्पॉन्सर भी कराए जा सकते हैं।
Q4. यदि किसी दिन स्कूल में स्थानीय अवकाश या छुट्टी हो, तो उस दिन की गतिविधि का क्या होगा?
उत्तर: यदि रविवार या कोई बड़ा स्थानीय अवकाश पड़ता है, तो संस्था प्रमुख उस दिन की विशेष गतिविधि को अगले कार्यदिवस में समायोजित (Adjust) कर सकते हैं, लेकिन मुख्य तिथियों जैसे 17 सितंबर, 25 सितंबर और 2 अक्टूबर के कार्यक्रम तय समय पर ही होंगे।
एक नागरिक के रूप में हमारा दृष्टिकोण
अक्सर यह देखा जाता है कि जब भी कोई सरकारी आदेश आता है, तो उसे कागजों और फाइलों तक सीमित मान लिया जाता है। लेकिन 'स्वच्छता ही सेवा' जैसे अभियान को हमें एक प्रशासनिक बोझ के रूप में नहीं देखना चाहिए। विद्यालय समाज का आईना होते हैं। यदि बचपन में ही बच्चों के मन में यह बात बैठ जाए कि कूड़ा सिर्फ डस्टबिन में ही डालना है, तो आने वाले 10-15 सालों में हमें देश को साफ करने के लिए अलग से बजट खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी शिक्षक साथियों से अनुरोध है कि वे इस कार्यक्रम को पूरे उत्साह के साथ मनाएं और अपने विद्यालय को एक आदर्श केंद्र के रूप में स्थापित करें।