कैसे फंसे शिक्षक ई-अटेंडेंस में, क्या शिक्षक लालच में आए थे, ई-अटेंडेंस शुरू हुए 1 साल होने वाला है। अब शिक्षकों के साथ क्या बड़ा होने वाला है और इस बार कैसे हुई DPI की जीत, पढ़ें इस पूरे लेख में।
कैसे शुरू हुआ ई-अटेंडेंस का प्रयोग
दिनांक 20.06.2025 को लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश क्रमांक/अकादमिक/ह.शि./2025/1074 जारी किया। इसमें कहा गया कि 23 जून से 30 जून 2025 तक ई-अटेंडेंस का ट्रायल होगा और 1 जुलाई 2025 से सभी शिक्षकों को ई-अटेंडेंस लगानी होगी।
लेकिन इस आदेश की भाषा अन्य आदेशों की तुलना में काफी शीतल और लुभावनी थी। इसे पढ़कर ऐसा लग रहा था कि यह शिक्षकों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
कैसे फंसे शिक्षक ई-अटेंडेंस में
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लुभावना आदेश
जब दिनांक 20.06.2025 को लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी किया, तो आदेश की भाषा काफी लुभावनी थी। आदेश में कहीं भी ई-अटेंडेंस लगाने के लिए जोर नहीं दिया गया। आदेश में कहा गया कि जिन शालाओं के सभी शिक्षक नियमित रूप से ‘हमारे शिक्षक’ प्रणाली में उपस्थिति दर्ज करेंगे, उनका निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से ही होगा तथा शिक्षकों के सेवा अभिलेख में इसे विशेष उपलब्धि के रूप में दर्ज किया जाएगा। भविष्य में ऐसी शालाओं एवं शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
इसी वजह से पहले ही दिन, यानी 1 जुलाई 2025 को, 10,461 कर्मचारियों ने ऐप पर उपस्थिति लगाई।
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ऐप की खासियत बताई गई
आदेश में कहा गया कि आने वाले समय में ‘हमारे शिक्षक’ प्रणाली केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी। इसके माध्यम से शिक्षक अपने सेवा संबंधी सभी आवेदन ऑनलाइन कर सकेंगे। साथ ही अवकाश, वेतन वृद्धि, समयमान वेतनमान, परिवीक्षा, प्रशिक्षण, पेंशन सहित अन्य सभी सेवा लाभों का रिकॉर्ड रखा जाएगा और पात्रता के अनुसार उनका ऑनलाइन निराकरण एवं भुगतान भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा।
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प्राचार्यों पर दबाव बनाया गया
जब DPI के आला अधिकारियों ने देखा कि बात नहीं बन रही है और बहुत सारे शिक्षक अब भी ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं, तो संकुल प्राचार्यों और शाला प्रभारियों पर ई-अटेंडेंस लगाने का दबाव बनाया गया। शाला प्रभारियों की ई-अटेंडेंस रिपोर्ट देखने के लिए सिस्टम भी बनाया गया, ताकि उनकी उपस्थिति की मॉनिटरिंग की जा सके.
जब उन पर दबाव बनाया गया, तो उन्होंने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर भी दबाव बनाया।
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शिक्षकों ने मिलकर ई-अटेंडेंस का विरोध नहीं किया
जब ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई, तो शिक्षक दो गुटों में बंट गए। एक गुट इस व्यवस्था को लागू करने में ई-अटेंडेंस लगाकर सहयोग कर रहा था, जबकि दूसरा गुट ई-अटेंडेंस नहीं लगाकर इसका विरोध कर रहा था।
लेकिन किसी भी शिक्षक संगठन ने इसका पुरजोर विरोध नहीं किया, जिससे शिक्षक कमजोर पड़ गए। कोर्ट ने भी शिक्षकों की ओर अपना झुकाव नहीं दिखाया।
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ऐप ने दिया साथ
‘हमारे शिक्षक’ ऐप को पूरी तैयारी के साथ बनाया गया था। इसमें कुछ समय के लिए दिक्कतें आईं, लेकिन उन दिक्कतों को उसी दिन दूर कर दिया गया। जिस दिन भी ऐप में कोई तकनीकी समस्या आई, उस दिन शिक्षकों के लिए दोपहर 3 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने की व्यवस्था चालू रखी गई।
अब क्या बड़ा होने वाला है
ई-अटेंडेंस शुरू हुए 1 जुलाई 2026 को पूरा एक साल होने वाला है। यह विभाग का एक सफल प्रयास रहा। अब तक शिक्षकों को काफी छूट दी गई। किसी दिन उपस्थिति नहीं लगा पाने पर भी वेतन का भुगतान किया गया, लेकिन अब इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया जाएगा।
इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश भी जारी कर दिया है। अब आदेशों की भाषा कोमल से कठोर हो गई है। इसमें कहा गया है कि समस्त कर्मचारियों को 1 जुलाई से नियमित ई-अटेंडेंस लगानी होगी। जिस दिन ई-अटेंडेंस नहीं लगाई जाएगी, उस दिन का वेतन भुगतान नहीं किया जाएगा।
कुछ सवालों के जवाब अब भी बाकी
1. क्या मिला उन 10,461 शिक्षकों को जिन्होंने प्रारंभ से ही उपस्थिति लगाई?
क्या उन शिक्षकों के लिए कोई विशेष प्रावधान किए गए, जिन्होंने पहले दिन से ही ई-अटेंडेंस लगाई? क्या उन्हें इसका कोई लाभ मिला, या वे केवल अपने सहकर्मियों के द्वेष का शिकार बने?
2. ई-अटेंडेंस से विभाग को क्या फायदा मिला? इससे कौन-सी कमियां सामने आईं? कितने शिक्षक नियमित समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते हैं?
3. क्या अब कभी इस ऐप में तकनीकी खामी नहीं आएगी? अगर आई, तो उस दिन शिक्षकों का वेतन कैसे बनेगा?
एक और बड़ी समस्या यह है कि जब भी ऐप में तकनीकी खामी आती है, तो क्या शिक्षक इस ऐप से इतर जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे या केवल बार-बार अपनी उपस्थिति लगाने का प्रयास करते रहेंगे?
यह समस्या इसलिए भी बड़ी है क्योंकि पिछले साल कई बार दोपहर 3 बजे तक ऐप में दिक्कत बनी रही थी।
तो क्या बच्चे 3 बजे तक शिक्षकों के इंतजार में बैठे रहेंगे? क्या कोई शिक्षक अपना वेतन भूलकर उन बच्चों को पढ़ाएगा?
4. जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में इस व्यवस्था को शिक्षकों के लिए अपमानजनक बताया था, तो अब यह सम्मानजनक कैसे हो गई?
ई-अटेंडेंस से शिक्षकों को क्या फायदा हुआ
ई-अटेंडेंस लागू होने से शिक्षकों की गरिमा बनी रही है। अब तक ऐसा कोई शिक्षक सामने नहीं आया, जो केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर निलंबित हुआ हो या जिस पर कोई बड़ी कार्रवाई हुई हो.
ई-अटेंडेंस से शिक्षकों और विभाग के बीच पारदर्शिता बढ़ी है।
